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बांग्लादेश की संस्कृति और विरासत: प्रश्न और उत्तर

हर प्रश्न का सही उत्तर और व्याख्या पढ़ें।

खुद को परखें
  1. 1. पहेला बैशाख किस अवसर पर मनाया जाता है?

    • A. नए धान की फ़सल
    • B. बांग्ला नववर्ष
    • C. वसंत का आगमन
    • D. मानसून की विदाई

    उत्तर: बांग्ला नववर्ष

    पहेला बैशाख बांग्ला कैलेंडर के पहले महीने बैशाख का पहला दिन है, जिसे बांग्लादेश में 14 अप्रैल को मनाया जाता है। परंपरागत रूप से बांग्ला संवत (बंगाब्द) की शुरुआत मुग़ल सम्राट अकबर से जोड़ी जाती है, जिन्होंने फ़सली कर वर्ष तय करने के लिए इसे अपनाया।

  2. 2. ढाका विश्वविद्यालय के ललित कला संकाय द्वारा आयोजित पहेला बैशाख की शोभायात्रा को 2016 में यूनेस्को ने किस नाम से सूचीबद्ध किया?

    • A. नबान्न उत्सव
    • B. बैशाखी मेला
    • C. मंगल शोभायात्रा
    • D. चैत्र संक्रांति

    उत्तर: मंगल शोभायात्रा

    विशाल मुखौटों और पक्षियों-पशुओं की रंगीन आकृतियों वाली मंगल शोभायात्रा को 2016 में यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया। ढाका के ललित कला के छात्र 1980 के दशक के अंत से यह शोभायात्रा निकालते आ रहे हैं।

  3. 3. 2013 में बांग्लादेश की कौन-सी पारंपरिक बुनाई कला यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल हुई?

    • A. जामदानी
    • B. नक्शी कांथा
    • C. शीतल पाटी
    • D. राजशाही सिल्क

    उत्तर: जामदानी

    महीन सूती कपड़े में बुनाई के दौरान ही डिज़ाइन उकेरने वाली पारंपरिक जामदानी बुनाई कला को 2013 में यूनेस्को ने सूचीबद्ध किया। सिलहट की पारंपरिक शीतल पाटी (ठंडी चटाई) बुनाई कला 2017 में इस सूची में जुड़ी।

  4. 4. पहाड़पुर बौद्ध विहार (सोमपुर महाविहार) के अवशेष किस ज़िले में हैं?

    • A. बोगुड़ा
    • B. राजशाही
    • C. दिनाजपुर
    • D. नओगाँ

    उत्तर: नओगाँ

    नओगाँ के पहाड़पुर में स्थित सोमपुर महाविहार हिमालय के दक्षिण में सबसे बड़े बौद्ध मठों में से एक था और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। इसके विशाल केंद्रीय मंदिर की दीवारें सैकड़ों टेराकोटा (पकी मिट्टी) पट्टिकाओं से सजी हैं।

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  6. 5. प्राचीन नगर पुंड्रनगर के अवशेष, महास्थानगढ़, किस ज़िले में हैं?

    • A. नओगाँ
    • B. बोगुड़ा
    • C. जयपुरहाट
    • D. गाइबांधा

    उत्तर: बोगुड़ा

    बोगुड़ा में करतोया नदी के किनारे स्थित महास्थानगढ़ बांग्लादेश का सबसे पुराना ज्ञात नगरीय पुरातात्विक स्थल माना जाता है, जिसका इतिहास कम से कम ईसा पूर्व तीसरी सदी तक जाता है। यहाँ मिले ब्राह्मी लिपि के एक शिलालेख में पुंड्रनगर का उल्लेख है।

  7. 6. नक्शी कांथा क्या है?

    • A. कढ़ाई वाली रज़ाई (कांथा)
    • B. मिट्टी का घड़ा
    • C. एक लोकनृत्य
    • D. नदी की नाव

    उत्तर: कढ़ाई वाली रज़ाई (कांथा)

    नक्शी कांथा पुरानी साड़ियों और कपड़ों की कई परतों से बनी रज़ाई है, जिस पर रंगीन धागों की सिलाई से तरह-तरह के मोटिफ़ और रोज़मर्रा के जीवन के दृश्य उकेरे जाते हैं। जसीमुद्दीन की प्रसिद्ध काव्य-कथा 'नक्शी कांथार माठ' का नाम इसी शिल्प से लिया गया है।

  8. 7. बांग्लादेश का राष्ट्रीय पक्षी कौन-सा है?

    • A. किंगफ़िशर (किलकिला)
    • B. मैना
    • C. दोयेल (मैगपाई रॉबिन)
    • D. मोर

    उत्तर: दोयेल (मैगपाई रॉबिन)

    दोयेल (ओरिएंटल मैगपाई रॉबिन) बांग्लादेश का राष्ट्रीय पक्षी है, और ढाका का प्रसिद्ध दोयेल चत्वर स्मारक इसी के नाम पर है। बांग्लादेश का राष्ट्रीय फूल शापला (कुमुदिनी/वाटर लिली) और राष्ट्रीय फल कटहल है।

  9. 8. नबान्न पारंपरिक रूप से किस अवसर का उत्सव है?

    • A. बांग्ला नववर्ष
    • B. वसंत का आगमन
    • C. मानसून की पहली बारिश
    • D. नए धान की फ़सल

    उत्तर: नए धान की फ़सल

    'नबान्न' का अर्थ है 'नया अन्न'; यह अग्रहायण महीने में आमन धान की कटाई के बाद पीठा (चावल के पकवान) और पायेस (खीर) के साथ मनाया जाता है। इसके विपरीत, पहेला फाल्गुन वसंत के स्वागत का उत्सव है।

  10. 9. बाउल संत लालन शाह (लालन फ़क़ीर) की समाधि (आखड़ा) छेउड़िया किस ज़िले में है?

    • A. जशोर
    • B. कुश्तिया
    • C. पाबना
    • D. राजबाड़ी

    उत्तर: कुश्तिया

    कुश्तिया के छेउड़िया में लालन शाह के आखड़े पर हर साल हज़ारों भक्त और बाउल गायक जुटते हैं। बाउल गीत, जिस रहस्यवादी लोक परंपरा के लिए वे सबसे अधिक जाने जाते हैं, यूनेस्को द्वारा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त हैं।

  11. 10. टेराकोटा (पकी मिट्टी) की नक्काशी के लिए प्रसिद्ध कांताजी मंदिर किस ज़िले में है?

    • A. दिनाजपुर
    • B. रंगपुर
    • C. ठाकुरगाँव
    • D. पंचगढ़

    उत्तर: दिनाजपुर

    दिनाजपुर शहर के पास स्थित कांताजी (कांतजीउ) मंदिर 18वीं सदी के मध्य में बनकर पूरा हुआ, और इसकी लगभग हर सतह महाकाव्यों व दैनिक जीवन के दृश्यों वाली टेराकोटा पट्टिकाओं से ढकी है। यह बंगाल की टेराकोटा मंदिर स्थापत्य कला का सर्वश्रेष्ठ उदाहरणों में से एक है।

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